Tuesday, August 1, 2023

 सरदार उधम सिंह


“अपनी मातृभूमि के खातिर जान देने से बड़ा सम्मान मेरे लिए और क्या हो सकता है।”

⬧ ‘शहीद-ए-आजम’ सरदार उधम सिंह का जन्म 26 दिसम्बर, 1899 को पंजाब के संगरूर ज़िले के सुनाम में हुआl
⬧ इनके बचपन का नाम शेरसिंह था।
⬧ अपने माता-पिता की मृत्यु के पश्चात् शेर सिंह अपने बड़े भाई मुक्ता सिंह के साथ अमृतसर के सेंट्रल खालसा अनाथालय में रहने लगे तथा अनाथालय में रहने के दौरान शेरसिंह ने सिख दीक्षा संस्कार का संचालन किया और इसके बाद शेर सिंह को उधम सिंह के नाम से जाना जाने लगा।
⬧ वे भगतसिंह से बहुत प्रभावित थे तथा उन्हें अपना गुरु मानते थे।
⬧ 13 अप्रैल, 1919 को जलियाँवाला हत्याकांड के बाद वे क्रांतिकारी गतिविधियों और राजनीति में सक्रिय हो गए।
⬧ सरदार उधम सिंह  वर्ष 1924 में औपनिवेशिक शासन को उखाड़ फेंकने के उद्देश्य से प्रवासी भारतीयों को संगठित करने के लिए ‘गदर पार्टी’ में शामिल हुए।
⬧ वर्ष 1927 में क्रांतिकारी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए सहयोगियों और हथियारों के साथ भारत लौटते समय उन्हें अवैध रूप से आग्नेयास्त्र रखने के आरोप में गिरफ्तार किया गया तथा पाँच साल की जेल की सज़ा सुनाई गई।
⬧ 13 मार्च, 1940 को उधम सिंह ने ‘ईस्ट इंडिया एसोसिएशन’ और ‘रॉयल सेंट्रल एशियन सोसायटी’ की कैक्सटन हिल में एक बैठक में माइकल ओ. डायर को गोली मार दी।
⬧ उधम सिंह को मृत्युदंड दिया गया तथा 31 जुलाई, 1940 को लंदन के पेंटनविले जेल में इन्हें फाँसी दे दी गई।

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