Tuesday, August 1, 2023

 पुरुषोत्तम दास टंडन


● पुरुषोत्तम दास टंडन का जन्म 1 अगस्त, 1882 इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था।यह आधुनिक भारत' के प्रमुख स्वाधीनता सेनानियों में से एक थे।यह'राजर्षि' के नाम से भी प्रसिद्ध थे।
● इनकी प्रारंभिक शिक्षा 'सिटी एंग्लो वर्नाक्यूलर विद्यालय' में हुई थी। इसके बाद इन्होंने एल.एल.बी. की डिग्री हासिल की और इतिहास विषय से एम.ए. किया।
● वर्ष 1906 में वकालत की प्रैक्टिस के लिए पुरुषोत्तम जी ने 'इलाहाबाद उच्च न्यायालय' में काम करना शुरू किया।
● पुरुषोत्तम दास टंडन ने 10 अक्टूबर, 1910 को 'नागरी प्रचारिणी सभा', वाराणसी के प्राँगण में 'हिन्दी साहित्य सम्मेलन',1918 में 'हिन्दी विद्यापीठ' और 1947 में 'हिन्दी रक्षक दल' की स्थापना की।
● पुरुषोत्तम जी हिन्दी को देश की आज़ादी के पहले 'आज़ादी प्राप्त करने का' और आज़ादी के बाद 'आज़ादी को बनाये रखने का' एक बड़ा साधन मानते थे।'
● पुरुषोत्तम दास टंडन हिन्दी में भारत की मिट्टी की सुगंध महसूस करते थे। 'हिन्दी साहित्य सम्मेलन' के 'इंदौर अधिवेशन' में स्पष्ट घोषणा की गई थी कि- "अब से राजकीय   सभाओं,कांग्रेस की प्रांतीय सभाओं और अन्य सम्मेलनों में अंग्रेज़ी का एक शब्द भी सुनाई न पड़े।"
● पुरुषोत्तम जी को वर्ष 1919 में 'जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड' का जाँच करने वाली कांग्रेस पार्टी की समिति के सदस्य बनाये गए थे। राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी के कहने पर पुरुषोत्तम जी ने वकालत को छोड़कर स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। उन्होंने 'रॉलेट एक्ट' विरोधी सत्याग्रह में में भाग लिया था।
● वर्ष 1930 में महात्मा गाँधी द्वारा चलाये जा रहे 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन' के सिलसिले में गिरफ्तार कर लिया गया। बाद में उन्होंने इलाहाबाद में 'कृषक आन्दोलन' का संचालन किया। उन्होंने उत्तर प्रदेश में 'सविनय अवज्ञा आन्दोलन' का भी संचालन किया। वे संयुक्त प्रांत व्यवस्थापिका परिषद् के सदस्य बने तथा वर्ष1937 में इसके अध्यक्ष भी नियुक्त हुए।
● पुरुषोत्तम दास टंडन ने भारत के विभाजन का डटकर विरोध किया। 1931 में लंदन में आयोजित 'गोलमेज सम्मेलन' से गाँधीजी के वापस लौटने से पहले जिन स्वतंत्रता सेनानियों को गिरफ्तार किया गया था, उनमें जवाहर लाल नेहरू के साथ पुरुषोत्तम दास टंडन भी थे।
● वर्ष 1950 में वे 'भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के अध्यक्ष नियुक्त हुए थे। पुरुषोत्तम दास टंडन को भारत के राजनीतिक और सामाजिक जीवन में नयी चेतना, नयी लहर, नयी क्रान्ति पैदा करने वाला कर्मयोगी कहा गया है।
● वर्ष 1961 में हिन्दी भाषा को देश में अग्रणी स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाने के लिए उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक पुरस्कार 'भारत रत्न' से भी सम्मानित किया गया था।
● पुरुषोत्तम जी संविधान सभा, लोक सभा और राज्य सभा के भी सदस्य रहे थे।
● राष्ट्रभाषा हिन्दी के लिए समर्पित पुरुषोत्तम दास टंडन जी का निधन 1 जुलाई, 1962 को हुआ।

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