महान स्वतंत्रता सैनानी लाला लाजपत राय
⬧ जन्म- 28 जनवरी, 1865 [पंजाब के फिरोज़पुर ज़िले के धुडीके गाँव में]⬧ उपनाम- 'पंजाब केसरी' एवं 'पंजाब का शेर'।
⬧ उच्च शिक्षा- लाहौर के गवर्नमेंट कॉलेज से कानून की पढ़ाई की।
⬧ वर्ष 1894 में पंजाब नेशनल बैंक के संस्थापक सदस्य रहे।
⬧ स्वामी दयानंद सरस्वती से प्रभावित होकर लाहौर में आर्य समाज में शामिल हुए।
⬧ लाला जी ने बिपिन चंद्र पाल और बाल गंगाधर तिलक के साथ मिलकर उन्होंने राष्ट्रवादी (गरम दल के) नेताओं की एक तिकड़ी (लाल-बाल-पाल) बनाई।
⬧ कालांतर में हिंदू महासभा से भी जुड़े तथा छुआछूत के खिलाफ अपना विरोध प्रदर्शित किया।
⬧ भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस में शामिल होने के उपरांत राजनीतिक आंदोलनों में हिस्सा लेने के कारण उन्हें वर्ष 1907 में बर्मा भेज दिया गया था, लेकिन पर्याप्त सबूतों के अभाव में जेल से रिहा कर दिया गया।
⬧ वर्ष 1917 में अमेरिका में 'होम रूल लीग ऑफ अमेरिका' की स्थापना की तथा इस संगठन द्वारा अमेरिका में अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के लिए नैतिक समर्थन प्रदान करने की अपील की गई।
⬧ वह 'अखिल भारतीय ट्रेड यूनियन कांग्रेस' के अध्यक्ष भी रहे।
⬧ सितंबर, 1920 में कांग्रेस का कलकत्ता अधिवेशन लाजपत राय की अध्यक्षता में हुआ था।
⬧ वर्ष 1926 में केंद्रीय विधानसभा का उप नेता चुना गया।
⬧ अकाल पीड़ित लोगों की मदद करने के लिए वर्ष 1897 में 'हिंदू राहत आंदोलन' शुरू किया।
⬧ वर्ष 1921 में 'सर्वेंट्स ऑफ पीपुल सोसाइटी' की स्थापना की।
⬧ साहित्यिक कृतियाँ- भारत में राष्ट्रीय शिक्षा की समस्या, इंग्लैंड डेब्ट टू इंडिया, यंग इंडिया, इंडियाज़ विल टू फ्रीडम, भगवद्गीता का संदेश एवं भारत का राजनीतिक भविष्य।
⬧ वर्ष 1928 में वह लाहौर में साइमन कमीशन के खिलाफ विरोध के दौरान पुलिस अधीक्षक जेम्स स्कॉट द्वारा उन पर क्रूरतापूर्वक लाठीचार्ज किया गया जिससे लगी चोटों के चलते कुछ समय बाद ही उनकी मृत्यु हो गई।
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