मंगल पाण्डे
⬧ सन् 1857 की क्रांति के प्रथम शहीद मंगल पाण्डे का जन्म 19 जुलाई, 1827 को सुरहरपुर (उत्तर प्रदेश) में हुआ था।
⬧ मंगल पाण्डे की माता अभयरानी व पिता श्री दिवाकर पाण्डे थे।
⬧ जब वह करीब दो वर्ष के थे तब एक संत ने मंगल की ललाट की रेखाएँ व जन्म के समय के ग्रहों की स्थिति देखकर भविष्यवाणी की थी कि बालक बलवान और साहसी होगा। इसके द्वारा किए गए कार्यों से यह इतिहास पुरुष बन जाएगा।
⬧ मंगल पाण्डे किसी कार्यवश सुरहरपुर से अकबरपुर आए हुए थे। उसी समय कम्पनी की सेना ग्रांड ट्रक रोड से होती हुई बनारस से लखनऊ जा रही थी। मंगल पाण्डे सेना का मार्च देखने के लिए कौतूहल सड़क के किनारे आकर खड़े हो गए। सैनिक अधिकारी द्वारा सेना में भर्ती हो जाने का आग्रह करने पर 10 मई, 1849 में इन्हें ईस्ट इंडिया कम्पनी की 34वीं रेजीमेंट, बैरकपुर छावनी में भर्ती कर लिया गया। यहीं से मंगल पाण्डे का सैनिक जीवन आरंभ हुआ। इस समय मंगल पाण्डे की आयु बाईस वर्ष थी।
⬧ सैनिक मंगल पाण्डे ने चर्बी लगे कारतूस के प्रयोग का विरोध किया तथा विद्रोह की शुरुआत कर दी। उसने सैन्य अधिकारी बॉग एवं ह्युसन को गोली मारकर हत्या कर दी।
⬧ 8 अप्रैल, 1857 को सैन्य अदालत के निर्णय के बाद मंगल पाण्डे को फाँसी की सजा दे दी गई।
⬧ मंगल पाण्डे को फाँसी देने के दो दिन बाद जमादार जिसने मंगल पाण्डे को कारतूसों में चर्बी होने की जानकारी दी उस पर 10 अप्रैल को मुकदमा चलाया और 20 अप्रैल को फाँसी दे दी।
⬧ अंग्रेज न्यायाधीश ने जब अंतिम अभिलाषा पूछी तो उन्होंने गरजते हुए कहा 'देश को मेरा खून देना तथा कहना कि तुम्हें सौगंध है अंग्रेज.....‘
⬧ मंगल पाण्डे अपना कथन पूरा करे, उससे पहले ही जल्लाद ने तख्ता हटा दिया। कर्नल मार्टिन ने फैजाबाद के सैनिक अधिकारी कर्नल इंट को पत्र लिखा, उसमें उल्लेख किया है कि जब मंगल पाण्डे को फाँसी दी गई है, तब से भारत की समस्त दैनिक छावनियों में जबर्दस्त विद्रोह प्रारंभ हो गया है।
⬧ मंगल पाण्डे के खानदान में जो भी मिला, उसे तोप के मुँह में भरकर अंग्रेजों ने उड़ा दिया। समस्त गाँव को नष्ट कर आग के हवाले कर दिया। फिर भी मंगल पाण्डे के कई निकट संबंधी बच गए, उनकी पत्नी विद्या व पुत्र कीर्ति ने सीरसी, जयपुर में शरण ली।
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