होमी जहाँगीर भाभा पुण्यतिथि
⬧ मुंबई के धनाढ्य और प्रतिष्ठित पारसी परिवार में 30 अक्टूबर, 1909 को जन्मे बहुमुखी प्रतिभा के धनी डा. होमी जहाँगीर भाभा ने सैद्धांतिक शोधों में पूरी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वैज्ञानिकों का ध्यान खींचा तथा राष्ट्रीय वैज्ञानिक संस्थानों के निर्माण में भी अतुलनीय योगदान दिया।⬧ उनकी प्रशंसा करते हुए डॉ. सी. वी. रमन ने वर्ष 1941 की भारतीय विज्ञान कांग्रेस में कहा था, 'भाभा संगीत के महान प्रेमी हैं, अत्यंत प्रतिभाशाली कलाकार हैं, मेधावी इंजीनियर हैं और उत्कृष्ट विज्ञानी हैं... वह आधुनिक काल के लियोनार्दो द विंची हैं।'
⬧ मुंबई में प्रारंभिक पढ़ाई के बाद भाभा ने कैंब्रिज के गोविल एंड कायस कॉलेज से मैकेनिकल इंजीनियरिंग की पढ़ाई की। हालाँकि उनका जुनून इंजीनियरिंग की बजाय न्यूक्लियर फिजिक्स की ओर था। वर्ष 1934 में उन्होंने फिजिक्स में पीएचडी की।
⬧ भाभा ने यूरोप का दौरा किया और ज्यूरिख में वोल्फगांग पॉली तथा रोम में एनरिको फर्मी के साथ काम किया। जर्मनी में उन्होंने कॉस्मिक किरणों पर अध्ययन और प्रयोग किए। होमी भाभा को प्रसिद्ध वैज्ञानिक रदरफोर्ड और नील्स बोर के साथ काम करने का अवसर मिला था।
⬧ उन्होंने नाभिकीय ऊर्जा की असीम क्षमता एवं उसकी विद्युत उत्पादन एवं सहायक क्षेत्रों में सफल प्रयोग की संभावना को पहचाना।
⬧ डॉ. भाभा ने नाभिकीय विज्ञान एवं इंजीनियरी के क्षेत्र में स्वावलंबन प्राप्त करने के लक्ष्य से यह कार्य प्रारंभ किया और आज का परमाणु ऊर्जा विभाग जो विविध विज्ञान एवं इंजीनियरी के क्षेत्रों का समूह है, डॉ. भाभा की दूरदृष्टि का परिणाम है।
⬧ डॉ. होमी जहाँगीर भाभा ने परमाणु ऊर्जा विद्युत उत्पादन के लिए एक व्यवहार्य वैकल्पिक स्रोत में उच्च क्षमता को पहचानते हुए मार्च, 1944 में भारतीय नाभिकीय कार्यक्रम प्रारंभ किया।
⬧ यह डॉ. भाभा की दूरदृष्टि ही थी जिसके कारण भारत में नाभिकीय अनुसंधान को उस समय प्रारंभ किया जब ओटो हान एवं फ्रिट्ज स्ट्रॅसमैन द्वारा नाभिकीय विखण्डन के चमत्कार की खोज की जा रही थी एवं तत्पश्चात् एन्रिको फर्मि व साथियों द्वारा अविच्छिन्न नाभिकीय शृंखला अभिक्रियाओं की व्यवहार्यता के बारे में रिपोर्ट किया गया।
⬧ डॉ. भाभा एक कुशल वैज्ञानिक और प्रतिबद्ध इंजीनियर होने के साथ-साथ एक समर्पित वास्तुशिल्पी, सतर्क नियोजक एवं निपुण कार्यकारी थे।
⬧ कैम्ब्रिज में भाभा का कार्य मुख्य रूप से ब्रह्माण्ड किरणों पर केंद्रित था। भाभा और हाइटलर ने 1937 में कॉस्मिक किरणों की बौछार की व्याख्या की।
⬧ वर्ष 1940 में वे भारतीय विज्ञान संस्थान, बेंगलुरु में रीडर के पद पर नियुक्त हुए। वहाँ पर उन्होंने कॉस्मिक किरणों की खोज के लिए अलग विभाग की स्थापना की।
⬧ जब 1941 में उन्हें रॉयल सोसाइटी का सदस्य चुना गया, तब उनकी उम्र मात्र 31 वर्ष थी। भाभा की प्रेरणा से जेआरडी टाटा ने 'टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च' की स्थापना की, जिसके महानिदेशक भाभा बने।
⬧ वर्ष 1948 में परमाणु ऊर्जा आयोग की स्थापना हुई और डॉ. भाभा इसके अध्यक्ष चुने गए।
⬧ वर्ष 1954 में परमाणु ऊर्जा विभाग की स्थापना की गई और भाभा इसमें भारत सरकार के सचिव नियुक्त किए गए। इसके साथ ही उन्होंने एटॉमिक एनर्जी एस्टब्लेशिमेंट, ट्राम्बे नाम की प्रयोगशाला की स्थापना की, जिसे अब लोग भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र के नाम से जानते हैं।
⬧ उनके प्रयासों से फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया का वर्ष 1962 में पहला हेवी वॉटर प्लांट स्थापित किया।
⬧ वर्ष 1965 में उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो से घोषणा की कि अगर जरूरत पड़े तो हम 18 महीने के अंदर परमाणु बम बना सकते हैं। 24 जनवरी, 1966 को विएना जाते समय माउंट ब्लांक (Mont Blanc) पर्वत शृंखला पर विमान हादसे में इस महान वैज्ञानिक के जीवन का अंत हुआ, लेकिन वह आज भी युवा विज्ञानियों के प्रेरणास्रोत हैं।
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